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Chandrayaan-3: चांद पर भी बस सकेंगे इंसान? खगोल विज्ञानी बोले- चंद्रयान-3 देगा सारी जानकारी

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Chandrayaan-3: चांद पर भी बस सकेंगे इंसान? खगोल विज्ञानी बोले- चंद्रयान-3 देगा सारी जानकारी

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नई दिल्ली. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के बेहद महत्वाकांक्षी तीसरे मून मिशन के तहत चंद्रयान-3 चांद की सतह पर उतरने को तैयार है. उम्मीद है कि चंद्रयान-3 का लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) से युक्त लैंडर मॉड्यूल (एलएम) बुधवार को शाम 6:04 बजे चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र के पास सॉफ्ट लैंडिंग करेगा. इस बीच खगोल विज्ञान विशेषज्ञ  मयंक एन वाहिया ने रोवर पेलोड द्वारा किए जाने वाले कुछ महत्वपूर्ण प्रयोगों पर प्रकाश डाला और कहा कि इसरो का यह मिशन चांद पर इंसानों की बसाहत शुरू करने की दिशा में काफी अहम साबित हो सकती है.

टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च के पूर्व खगोल विज्ञान प्रोफेसर मयंक एन वाहिया ने समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा कि पहले चंद्रयान (Chandrayaan-1) मिशन ने निर्णायक रूप से स्थापित किया कि चांद पर पानी मौजूद है. उन्होंने कहा, ‘इसके बाद चंद्रयान-2 मिशन को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडर उतारना था, जहां बहुत सारा पानी होने का अनुमान है. लेकिन किसी कारण से, चीजें ठीक से काम नहीं कर पाईं.’

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बता दें कि भारत के पहले चंद्र मिशन चंद्रयान-1 को 2008 में प्रक्षेपित किया गया था. वहीं चंद्रयान-2 मिशन 7 सितंबर, 2019 को चंद्रमा पर उतरने की प्रक्रिया के दौरान उस समय असफल हो गया था, जब उसका लैंडर ‘विक्रम’ ब्रेक संबंधी प्रणाली में गड़बड़ी होने के कारण चंद्रमा की सतह से टकरा गया था.

इसे लेकर खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी विभाग के साथ लगभग चार दशक तक जुड़े रहे प्रोफेसर वाहिया कहते हैं, ‘चंद्रयान-3 मिशन को लेकर इसरो के सामने बड़ी चुनौती है, लेकिन उन्होंने पिछली गलतियों से बहुत कुछ सीखा है.’

‘चांद पर पानी और खनिजों की मौजूदगी की देगा जानकारी’
प्रोफेसर वाहिया ने इसके साथ ही विश्वास जताया कि 23 अगस्त को चंद्रयान-3 सफलतापूर्वक चांद की सतह पर लैंड करेगा. उन्होंने कहा कि एक बार जब लैंडर मॉड्यूल वहां उतर जाएगा, तो लैंडर और रोवर वैज्ञानिकों को पानी के बारे में अभूतपूर्व मात्रा में डेटा मुहैया कराएंगे.

इसके साथ ही उन्होंने कहा, ‘चंद्रयान-3 हमें दक्षिणी ध्रुव में पानी, जल स्रोतों और खनिजों को समझने में मदद करेगा, जो चंद्रमा पर इंसानी बसाहत की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा.’

चांद के इस हिस्से की जानकारी बेहद कम
बता दें कि चंद्रयान-3 को इस साल 14 जुलाई को प्रक्षेपित किया गया था, जो बुधवार 23 अगस्त को चंद्रमा के दक्षिण ध्रुवीय क्षेत्र पर सॉफ्ट लैंडिंग का प्रयास करेगा. सॉफ्ट-लैंडिंग के बाद, रोवर अपने एक साइड पैनल का उपयोग करके लैंडर के अंतर से चंद्रमा की सतह पर उतरेगा.

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चंद्रमा के परिवेश का अध्ययन करने के लिए लैंडर और रोवर का मिशन जीवन एक चंद्र दिवस (पृथ्वी पर लगभग 14 दिनों के बराबर) का होगा. इस लैंडर में चंद्रमा के एक निर्दिष्ट स्थल पर सॉफ्ट-लैंडिंग करने और रोवर को तैनात करने की क्षमता होगी जो वहां इधर उधर चलते हुए रासायनिक विश्लेषण करेगा. इन दोनों के पास चंद्रमा की सतह पर प्रयोग करने के लिए वैज्ञानिक पेलोड हैं.

चंद्रमा के ध्रुवीय क्षेत्र पर्यावरण और उनके द्वारा पेश की जाने वाली कठिनाइयों के कारण बहुत अलग भूभाग हैं और इसलिए उनका अभी तक अन्वेषण नहीं हुआ है. चंद्रमा पर पहुंचने वाले पिछले सभी अंतरिक्ष यान भूमध्यरेखीय क्षेत्र में उतरे हैं. चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र का भी पता लगाया जा रहा है, क्योंकि इसके आसपास के क्षेत्रों में पानी की मौजूदगी की संभावना हो सकती है.

Tags: Chandrayaan-3, ISRO, Mission Moon

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