Home Blog डेंगू का प्रकोप 662 लोगों का चल रहा इलाज,6 साल से राखी ब्लड सेपरेटर मशीन नहीं हो पाई शुरू –

डेंगू का प्रकोप 662 लोगों का चल रहा इलाज,6 साल से राखी ब्लड सेपरेटर मशीन नहीं हो पाई शुरू –

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डेंगू का प्रकोप 662 लोगों का चल रहा इलाज,6 साल से राखी ब्लड सेपरेटर मशीन नहीं हो पाई शुरू –

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रायगढ़38 मिनट पहले

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वार्ड नंबर 12, 13 और 17 में ज्यादा मरीज मिल रहे थे - Dainik Bhaskar

वार्ड नंबर 12, 13 और 17 में ज्यादा मरीज मिल रहे थे

डेंगू की रोकथाम के लिए प्रशासन दिन-रात बैठक अभियान दवा छिड़काव और लोगों को जागरूक करने में जुटा है। नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की 700 लोगों की टीम लगातार काम कर रही है। लेकिन, डेंगू का कहर थम नहीं रहा है। हर दिन 30 डेंगू पीड़ित मरीज मिल रहे हैं।

डेंगू से गंभीर मरीज प्लेटलेट्स की

इसकी वजह है कि मेडिकल कॉलेज अस्पताल में ब्लड सेपरेटर मशीन नहीं है, जरूरत पड़ने पर प्लेटलेट्स के लिए मरीज के परिजन को भटकना पड़ रहा है। अफसरों के मुताबिक पिछले 7 दिनों से चल रहे अभियान का असर अगले एक-दो दिनों में दिखेगा और डेंगू का प्रकोप कम होगा।

अब तक 662 लोग आए चपेट में

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार बुधवार को 30 मरीज के साथ 662 केस सामने आ चुके हैं। पहले शहर में वार्ड नंबर 12, 13 और 17 में ज्यादा मरीज मिल रहे थे। अब डेंगू का प्रकोप दूसरे इलाकों तक पहुंचा है। केलो बिहार, बीड़पारा, रामगुड़ीपारा, दरोगापारा, इतवारी बाजार क्षेत्र शामिल है वहीं पहले से बने हॉटस्पॉट गौशालापारा, कोतरारोड, केवड़ाबाड़ी बस स्टैंड, केवटावारा, लालटंकी जैसे इलाकों से मरीज मिल रहे हैं।

कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त दौरे पर

कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त दौरे पर

ब्लड सेपरेटर मशीन तो है पर टेक्नीशियन है ट्रेनिंग में

वर्ष 2017 में तत्कालीन कलेक्टर शम्मी आबिदी ने डेंगू के प्रकोप और व प्लेटलेट्स की कमी को देखते हुए प्रयास किया। तब मेडिकल कॉलेज में ब्लड सेपरेटर मशीन मिली। इससे खून से प्लेटलेट्स अलग कर गंभीर मरीजों को चढ़ाया जा सके। यह मशीन लगभग छह सालों से बंद पड़ी है है। मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर बताते हैं कि मशीन का लाइसेंस के केंद्र राज्य व नाको से परमिशन जरूरी होती है, प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। मशीन को चलाने के लिए टेक्निशियन की जरूरत होती है। हॉस्पिटल के तीन स्टाफ के ट्रेनिंग के जिंदल हॉस्पिटल भेजा गया था। एक कर्मचारी का ट्रांसफर हो चुका है दो की ट्रेनिंग जल्द ही पूरा हो जाएगी।

21 से 30 दिन तक होता डेंगू मच्छर का जीवनचक्र

जिला मलेरिया अधिकारी टीजी कुलवेदी ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग अन्य विभागों के प्रयास से डेंगू पर नियंत्रण किया जा रहा है। डेंगू पीड़ित को 24 घंटे मच्छरदानी में रहना है, लेकिन लोगों में जागरूकता की कमी है। लोग पीड़ित होने के बाद भी खुले में घूम रहे हैं। डेंगू के मच्छर के जीवनचक्र 21 से 30 दिन तक होता है। ऐसे में जिन मोहल्लों में डेंगू के मरीज आ रहे, उन क्षेत्रों के लोगों स्वंय का जागरूक होना जरूरी है।

हॉटस्पॉट गौशालापारा, कोतरारोड, केवड़ाबाड़ी बस स्टैंड

हॉटस्पॉट गौशालापारा, कोतरारोड, केवड़ाबाड़ी बस स्टैंड

बैठक के बाद निजी अस्पतालों से मिल रही प्लेटलेट्स की जानकारी

पिछले सप्ताह हुई बैठक में डेंगू रैपिड टेस्ट से साथ डेंगू पीड़ितों की जानकारी देने को कहा गया था। अब निजी हॉस्पिटल से पाजिटिव मरीज की जानकारी विभाग को भेजी जा रही है। अब प्लेटलेट्स की जानकारी भी स्वास्थ्य विभाग को मिल रही है। इससे गंभीर मरीज का तुरंत स्वास्थ्य मिल सके। बैठक में डेंगू टेस्ट पर रिहायत बरती गई थी जिसके बाद फिवर आने के बाद ज्यादातर लोग डेंगू के टेस्ट करा रहे हैं।

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