Home Blog कॉपर माइंस का कंट्रोल मिलते ही जांबिया के सप्लायर्स का कर्ज चुका देंगे अनिल अग्रवाल

कॉपर माइंस का कंट्रोल मिलते ही जांबिया के सप्लायर्स का कर्ज चुका देंगे अनिल अग्रवाल

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कॉपर माइंस का कंट्रोल मिलते ही जांबिया के सप्लायर्स का कर्ज चुका देंगे अनिल अग्रवाल

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वेदांता रिसोर्सेज लिमिटेड (Vedanta Resources Ltd.) का कहना है कि जांबिया में कॉपर माइंस का कंट्रोल मिलने के बाद वहां के सप्लायर्स की 25 करोड़ डॉलर बकाया राशि का भुगतान तुरंत कर दिया जाएगा। जांबिया (Zambia) की सरकार ने 4 साल पहले कंपनी की कॉपर माइंस को जब्त कर लिया था।

जांबिया के तत्कालीन राष्ट्रपति एडगर लुन्गू (Edgar Lungu) के प्रशासन ने 2019 में अनिल अग्रवाल के मालिकाना हक वाली कंपनी वेदांता पर विस्तार योजनाओं के बारे में झूठ बोलने और काफी कम टैक्स देने का आरोप लगाते हुए यह कार्रवाई की थी। इसके बाद कंपनी और सरकार के बीच कई मुकदमे हुए। आखिरकार, जांबिया के मौजूदा राष्ट्रपति हकाइंदे हिचिलेमा (Hakainde Hichilema) ने समझौते के जरिये विवादों को निपटाने की पहल की।

अग्रवाल ने जांबिया की कोनकोला (Konkola) कॉपर माइंस में 1 अरब डॉलर निवेश करने का वादा किया है। साथ ही, उन्होंने यहां से कॉपर का प्रॉडक्शन भी डबल करने की बात कही है। जांबिया में इस साल यानी 2023 में कॉपर का प्रॉडक्शन पिछले 14 साल में सबसे कम रहने का अनुमान जताया गया है। कॉपर इंडस्ट्री को नए निवेश की सख्त जरूरत है, ताकि कॉपर की बढ़ती मांग का ज्यादा से ज्यादा फायदा उठाया जा सके।

अग्रवाल ने जोहान्सबर्ग में दिए गए एक इंटरव्यू में कहा कि कंपनी की योजना सभी लेनदारों की बकाया राशि का भुगतान करने की है, ताकि लोगों का दिल जीता जा सके। उन्होंने कहा, ‘पैसा इसमें कभी भी बाधा नहीं बनेगा।’

वेदांता के पास 2024 में 2 अरब डॉलर का बॉन्ड बकाया है। साथ ही, कंपनी को जनवरी में 1.1 अरब डॉलर का भुगतान करना है। भारतीय शेयर बाजार में 24 अगस्त को कंपनी का शेयर 1.3 पर्सेंट की बढ़त के साथ बंद हुआ, जो पिछले दो हफ्ते की सबसे बड़ी बढ़त है। माइंस में उत्पादन बढ़ने से जांबिया को टैक्स रेवेन्यू बढ़ाने में मदद मिलेगी। जांबिया अपने 70 पर्सेंट एक्सपोर्ट रेवेन्यू के लिए कॉपर पर ही निर्भर है।

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